241475809_6697419580283435_8978911448684177355_n

वन अधिकार कानून 2006 के जल्द क्रियान्वयन की मांग!

*आज तक वन अधिकार समितियों को कानून की जानकारी नहीं, प्रशिक्षण की कमी चिंताजनक: सिरमौर वन अधिकार मंच*
*प्रेस विज्ञप्ति: नोहराधार | 5.09.2021:* सरकारी वन भूमि पर जनता के अधिकारों को मान्यता देने वाले वन अधिकार कानून की बहाली में विलम्ब को ले कर सिरमौर वन अधिकार मंच के सदस्यों ने आज नोहराधार की 13 पंचायत प्रधानों के साथ बैठक के माध्यम से वन अधिकार कानून की जानकारी दी। गौरतलब है कि वन अधिकार कानून (FRA) जो कि भारतीय संसद द्वारा पारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है के क्रियान्वयन में हिमाचल देश के बाकी प्रदेशों से बहुत पीछे है लेकिन उसमें भी सिरमौर जिला सबसे पिछड़ा है।
ध्यान में रखने वाली बात है कि FRA के तहत सभी प्रकार कि वन भूमि जिसपर कृषि या फिर आवास के लिए लोगों के 13 दिसम्बर 2005 के पहले के कब्ज़े हैं उनको कानूनी मान्यता देने का प्रावधान है. सिरमौर के समुदाय इस कानून में अन्य परम्परागत वन निवासी की श्रेणी में आते हैं और इसके अंतर्गत पात्र दावेदार हैं. इसके अलावा कानून में वन भूमि के सामूहिक उपयोग – जैसे घास, चारा, इंधन आदि के लिए सामूहिक अधिकार भी प्राप्त किये जा सकते हैं. अधिकार प्राप्त होने के बाद इसको राजस्व जमाबंदी में दर्ज किया जाता है.
‘पूरे ही सिरमौर में वन अधिकार कानून की जानकारी का अभाव है साथ ही 2002 मे राज्य सरकार की रेगुलराइज़ेशन पालिसी के असफल होने की वजह से लोगो को बेदखली का डर है। परन्तु ये कानून संसद द्वारा पारित है और लोगों को ये आश्वस्त करना सरकार का काम है ताकि लोग अपनी दावेदारी के फार्म पेश कर सकें । ऐसे तो हर गांव में वन अधिकार समिति (FRC) बनाई गई हैं लेकिन अधिकतर जगहों में FRC के सदस्यों को उनकी जिम्मेदारी या दायित्वों की जानकारी नही हैं और नाहीं कानून के तहत दावे भरने की प्रक्रिया की ‘, प्रकाश भंडारी, हिमधरा पर्यावरण समूह |
‘2019 में तैयार की गई सरकारी प्रशिक्षण सामग्री खासकर FRC को मार्गदर्शन देने के लिए बनाई गई पर आज तक वो FRCs तक पहुंची नही है और या तो पंचायत या BDO कार्यालय में पड़ीं हैं। FRC के सदस्य, प्रधान व वन अधिकार कानून की प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों का प्रशिक्षण व इस कानून की प्रशिक्षण पुस्तिका का वितरण जल्द से जल्द किया जाना चाहिए’, ज़िला परिषद सदस्य, पृथ्वीराज चौहान ने कहा ।
‘वन अधिकार कानून के तहत दावा फॉर्म भरने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या मौजा स्तर पर ग्राम सभा का कोरम पूरा करने में आती है। इसलिए जहां ज़रूरत है वहां उप गांव, टोला, पत्ती स्तर पर FRC के पुनर्गठन में प्रशासन को सहयोग देना चाहिए’, रमेश वर्मा, अध्यक्ष, किसान सभा, सिरमौर ।
सूचना के अधिकार से प्राप्त हुई जानकारी अनुसार पुरे सिरमौर में अभी तक कुल 40 व्यक्तिगत व 2 सामुदायिक दावे फ़ाइल किये गए जिनमे से कई दावे ढाई साल से अधिक समय से उप मंडल स्तरीय समिति (SDLC) के समक्ष ही लंबित है और कानून के अस्तित्व में आये लगभग 15 सालों के अंतराल में आज तक एक भी दावा जिला स्तरीय समिति (DLC) तक नही पहुँचा है । 6 में से 4 तहसील में आज तक एक भी दावा फॉर्म नही भरा गया है, गुलाब सिंह, सिरमौर वन अधिकार मंच।
पूरे जिले में इतने कम दावे होने का कारण उपर्युक्त मुद्दों के अलावा प्रशासनिक मंशा में कमी व प्रशासनिक अधिकारीयों में भी कानून को ले कर कई भ्रम है। दावा फॉर्म भरने के लिए साक्ष्य दस्तावेजों के मिलने में बहुत देरी होती है और कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। उस पर भी दस्तावेजों के उर्दू भाषा में होने के कारण उनके अनुवाद का खर्चा भी गाँव के लोगों पर पड़ता है जो हजारों में होता है | वन अधिकार कानून को आये 15 साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन राजनैतिक इच्चाश्क्ति की कमी के चलते कानून को लागू करने के लिए ज़रूरी कदम आज तक नहीं उठाये गये।
-Endangered Himalayas

Related Posts

News Update:
Latest AQI:

AQI Parameters as on Date: 13th June 2024

Community Corner:
Latest from our YouTube Channel:
चौथान क्षेत्र में अतिवृष्टि से जनजीवन अस्त व्यस्त* 
*डांग, स्यूंसाल गांव में बादल फटने से भारी तबाही*
*किंवाड़ी, जैंती, डडोली गांव में खेत, पुल बहे* 
चौथान समाचार 01 अगस्त 2024 
31 जुलाई 2024 की शाम पांच बजे से आठ बजे तक अतिवृष्टि से चौथान क्षेत्र में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गनीमत है की अतिवृष्टि से कोई जन हानि नहीं हुई है परन्तु निजी एवं सार्वजनिक सम्पति को खासा नुकसान हुआ है।  क्षेत्र को थैलीसैण-नागचुला से जोड़ने वाली मुख्य सड़क जग- जगह क्षतिग्रस्त हो गई है जिससे  यातायात पूरी तरह बाधित है। 
इस बीच चौथान पट्टी के डांग और स्यूंसाल गांव में दो जगह बादल फटने से बड़े पैमाने पर नुकसान की सुचना है। देर शाम सात बजे बादल फटने से डांग गांव के दो गदेरों में उफान आ गया और गांव दोनों तरह से बाढ़ से घिर गया। जिससे आधा दर्जन के करीब घरों में मलबा भर गया। एक घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त है और ग्रामीणों को रात को गांव के स्कूल में शरण लेनी पड़ी। बाढ़ से गांव के कई रास्तों, शौचालयों, गोशालाओं को नुकसान की सुचना हैं। 
ग्राम प्रधान दामोदर नेगी के अनुसार बादल फटने से आये सैलाब  में दस के करीब पैदल पुलिया पूरी तरह से बह गई हैं। वहीँ बड़ी संख्या में डांग और किम्वादी गांव के उपजाऊ खेत धान, झुंगरा, कौदा की फसल समेत बाढ़ में बह गए हैं और बड़ी संख्या में खेतों में मलबा भरने से फसल चौपट हो गयी है। 
डांग के समीपवर्ती गांव जैंती में भी अतिवृष्टि से घरों, गौशालाओं और खेतों को नुकसान की खबर है। डांग के गदेरों के उफान ने किंवाड़ी गांव होते हुए, निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई है। किंवाड़ी निवासी रंजीत सिंह की दो भैसों के भी बाढ़ में बहने की सुचना है। इस बाढ़ से क्षेत्र में प्रसिद्ध सांखेश्वर धाम मंदिर के एक हिस्से को भी क्षतिग्रस्त किया है। मंदिर तक जाने वाली पैदल पुलिया भी बाढ़ में बह गयी है। 
*स्यूंसाल में फिर फटा बादल* 
वही मूसलाधार बारिश के बीच शाम लगभग साढ़े सात बजे स्यूंसाल के मल्या गदेरे में बादल फट गया। जिससे मुतरखाल से लेकर तैल्या शेरा तक सैकंडों पेड़, खेत फसल समेत बाढ़ में बह गए। अतिवृष्टि से गांव के कई अन्य गेदरों में भीषण उफान से कई जगह भूस्खलन हुआ जिससे बड़े पैमाने में गांव की जमीन, खेत और फसल कटाव और बहने के चलते तबाह हो गए। 
शुरुआती जानकारी अनुसार,  बादल फटने और अतिवृष्टि से आई आपदा में स्यूंसाल गांव की सैकड़ों नाली खेती की जमीन फसल समेत बह गयी है। साथ में गांव के दो बिजली के खम्बे गिर गए हैं, एक पैदल पुलिया भी बाढ़ की चेपट में आने से क्षतिग्रस्त हैं। वहीँ एक पैदल पुलिया और 300 मीटर मीटर से अधिक मोटर मार्ग आपदा में बह गया है।  इसके अलावा गांव में पुश्ते गिरने से तीन घरों पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है और एक दर्जन से ज्यादा गौशालाएं, अनेक पैदल रास्ते भी आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 
*आपदा, विभागीय लापरवाही की मार झेल रहे स्यूंसाल के ग्रामीण* 
गौरतलब है कि सितम्बर 2021 में भी स्यूंसाल गांव में बादल फटने से भारी तबाही मची थी। जिससे ग्रामीण दहशत के साये में हैं। पिछली आपदा में हुए नुकसान के लिए प्रभावित ग्रामीणों को प्रशासन की तरह से कोई खास आर्थिक मदद नहीं मिली। दूसरी तरफ, तीन साल से अधिक समय होने के बाद भी लोक निर्माण विभाग ने गांव में बनी नई सड़क पर जलनिकासी, पुलिया, कल्वर्ट निर्माण नहीं किया है। 
नई सड़क बनने के दौरान ठेकेदार ने गांव के गदेरों को मलबे से पूरी तरह पाट दिया था। अब ये मलबा बरसात के दौरान गांव के घरों, खेतों को बार-बार भारी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार लिखित में इस समस्या के बाबत लोक निर्माण विभाग को अवगत किया है। परन्तु विभाग द्वारा इस दिशा में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं  हुई है। जिससे ग्रामीण स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की उदासीनता पर खासे नाराज हैं। 
वहीँ अतिवृष्टि से चौथान के डडोली गांव में भी खेतों, फसलों, रास्तों को नुकसान की सुचना है। डडोली गांव में एक पुलिया भी नाले में आई बाढ़ से बह गई है। फ़िलहाल डांग के ग्रामीणों ने सुबह पांच बजे ही थैलीसैंण प्रशासन को आपदा की सुचना दे दी थी। इसके बाद सुबह लगभग दस बजे आपदा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम किम्वादी होते हुए डाँग गांव पहुंची और बादल फटने से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। जैंती दौरे के उपरांत इस टीम के शाम को स्यूंसाल गांव पहुंचने की खबर है।
#uttrakhand 
#uttrakhandlandslide #uttarakhandfloods #uttarakhanddisaster

चौथान क्षेत्र में अतिवृष्टि से जनजीवन अस्त व्यस्त*
*डांग, स्यूंसाल गांव में बादल फटने से भारी तबाही*
*किंवाड़ी, जैंती, डडोली गांव में खेत, पुल बहे*
चौथान समाचार 01 अगस्त 2024
31 जुलाई 2024 की शाम पांच बजे से आठ बजे तक अतिवृष्टि से चौथान क्षेत्र में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गनीमत है की अतिवृष्टि से कोई जन हानि नहीं हुई है परन्तु निजी एवं सार्वजनिक सम्पति को खासा नुकसान हुआ है। क्षेत्र को थैलीसैण-नागचुला से जोड़ने वाली मुख्य सड़क जग- जगह क्षतिग्रस्त हो गई है जिससे यातायात पूरी तरह बाधित है।
इस बीच चौथान पट्टी के डांग और स्यूंसाल गांव में दो जगह बादल फटने से बड़े पैमाने पर नुकसान की सुचना है। देर शाम सात बजे बादल फटने से डांग गांव के दो गदेरों में उफान आ गया और गांव दोनों तरह से बाढ़ से घिर गया। जिससे आधा दर्जन के करीब घरों में मलबा भर गया। एक घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त है और ग्रामीणों को रात को गांव के स्कूल में शरण लेनी पड़ी। बाढ़ से गांव के कई रास्तों, शौचालयों, गोशालाओं को नुकसान की सुचना हैं।
ग्राम प्रधान दामोदर नेगी के अनुसार बादल फटने से आये सैलाब में दस के करीब पैदल पुलिया पूरी तरह से बह गई हैं। वहीँ बड़ी संख्या में डांग और किम्वादी गांव के उपजाऊ खेत धान, झुंगरा, कौदा की फसल समेत बाढ़ में बह गए हैं और बड़ी संख्या में खेतों में मलबा भरने से फसल चौपट हो गयी है।
डांग के समीपवर्ती गांव जैंती में भी अतिवृष्टि से घरों, गौशालाओं और खेतों को नुकसान की खबर है। डांग के गदेरों के उफान ने किंवाड़ी गांव होते हुए, निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई है। किंवाड़ी निवासी रंजीत सिंह की दो भैसों के भी बाढ़ में बहने की सुचना है। इस बाढ़ से क्षेत्र में प्रसिद्ध सांखेश्वर धाम मंदिर के एक हिस्से को भी क्षतिग्रस्त किया है। मंदिर तक जाने वाली पैदल पुलिया भी बाढ़ में बह गयी है।
*स्यूंसाल में फिर फटा बादल*
वही मूसलाधार बारिश के बीच शाम लगभग साढ़े सात बजे स्यूंसाल के मल्या गदेरे में बादल फट गया। जिससे मुतरखाल से लेकर तैल्या शेरा तक सैकंडों पेड़, खेत फसल समेत बाढ़ में बह गए। अतिवृष्टि से गांव के कई अन्य गेदरों में भीषण उफान से कई जगह भूस्खलन हुआ जिससे बड़े पैमाने में गांव की जमीन, खेत और फसल कटाव और बहने के चलते तबाह हो गए।
शुरुआती जानकारी अनुसार, बादल फटने और अतिवृष्टि से आई आपदा में स्यूंसाल गांव की सैकड़ों नाली खेती की जमीन फसल समेत बह गयी है। साथ में गांव के दो बिजली के खम्बे गिर गए हैं, एक पैदल पुलिया भी बाढ़ की चेपट में आने से क्षतिग्रस्त हैं। वहीँ एक पैदल पुलिया और 300 मीटर मीटर से अधिक मोटर मार्ग आपदा में बह गया है। इसके अलावा गांव में पुश्ते गिरने से तीन घरों पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है और एक दर्जन से ज्यादा गौशालाएं, अनेक पैदल रास्ते भी आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
*आपदा, विभागीय लापरवाही की मार झेल रहे स्यूंसाल के ग्रामीण*
गौरतलब है कि सितम्बर 2021 में भी स्यूंसाल गांव में बादल फटने से भारी तबाही मची थी। जिससे ग्रामीण दहशत के साये में हैं। पिछली आपदा में हुए नुकसान के लिए प्रभावित ग्रामीणों को प्रशासन की तरह से कोई खास आर्थिक मदद नहीं मिली। दूसरी तरफ, तीन साल से अधिक समय होने के बाद भी लोक निर्माण विभाग ने गांव में बनी नई सड़क पर जलनिकासी, पुलिया, कल्वर्ट निर्माण नहीं किया है।
नई सड़क बनने के दौरान ठेकेदार ने गांव के गदेरों को मलबे से पूरी तरह पाट दिया था। अब ये मलबा बरसात के दौरान गांव के घरों, खेतों को बार-बार भारी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार लिखित में इस समस्या के बाबत लोक निर्माण विभाग को अवगत किया है। परन्तु विभाग द्वारा इस दिशा में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। जिससे ग्रामीण स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की उदासीनता पर खासे नाराज हैं।
वहीँ अतिवृष्टि से चौथान के डडोली गांव में भी खेतों, फसलों, रास्तों को नुकसान की सुचना है। डडोली गांव में एक पुलिया भी नाले में आई बाढ़ से बह गई है। फ़िलहाल डांग के ग्रामीणों ने सुबह पांच बजे ही थैलीसैंण प्रशासन को आपदा की सुचना दे दी थी। इसके बाद सुबह लगभग दस बजे आपदा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम किम्वादी होते हुए डाँग गांव पहुंची और बादल फटने से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। जैंती दौरे के उपरांत इस टीम के शाम को स्यूंसाल गांव पहुंचने की खबर है।
#uttrakhand
#uttrakhandlandslide #uttarakhandfloods #uttarakhanddisaster

YouTube Video VVVmc21PemlDSU14SkZKQUcxUVhiNnRnLkpNdnFDbV94QjB3
0:00
0:00